किसने दिखाए सपनें ?
स्वप्नील, सुनहरे, सुन्दर
डरावने, जानलेवा, खूंखार, दमघोटू
क्या तुम्हे खेद है?
सपनों के बदसूरत होने का
सपनों के टूट जाने पर खेद नहीं तुम्हे?
और अगर है भी तो क्या? और क्यूँ?
किसने दिखाए सपने तुम्हे?
पूछता हूँ किसने दिखाए तुम्हे, सपने ?
तो क्यूँ है मातम, सन्नाटा, क्रंदन ?
सपनें सच हो तो अपने
और टूट जाएँ तो पराए
पूछता हूँ किसने देखे सपनें?
उठो और जिओ, हिम्मत है तो
सपनों से आगे उस सच को
जो डरावनी है शायद
लेकिन जिंदा है ।